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जनपद कन्नौज के छिबरामऊ ब्लॉक में ग्राम हरिवल्लभपुर आंगनवाड़ी केंद्र (रुद्रापुर) में मासिक टीकाकरण कार्यक्रम किया गया आयोजित –

मासिक टीकाकरण कार्यक्रम -

 

आज दिनांक 6/06/2026 दिन शनिवार को आंगनवाड़ी,ANM,आशा, द्वारा मासिक टीकाकरण कार्यक्रम किया गया आयोजित – 

भारत जैसे विकासशील देश में शिशु मृत्यु दर को कम करने और बच्चों को संक्रामक बीमारियों से बचाने में आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा संचालित मासिक टीकाकरण कार्यक्रम का योगदान अतुलनीय है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (आशा) और एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) मिलकर यह कार्यक्रम चलाती हैं, जो ग्रामीण और शहरी बस्तियों दोनों में माताओं व बच्चों तक टीकाकरण की सुविधा पहुँचाता है।

इसी कार्यक्रम के तहत आज जनपद कन्नौज के छिबरामऊ ब्लॉक में ग्राम पंचायत हरिवल्लभपुर के आंगनवाड़ी केंद्र (रुद्रापुर) में टीकारण कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें ANM वीनू शर्मा,आंगनवाड़ी कार्यकत्री सरस्वती,आशा गीता देवी उपस्थित रहीं।जिसमें गर्भवती महिलाओं एवम् 0 से 6 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण किया गया।

आंगनवाड़ी कार्यकत्री सरस्वती ने बताया टीकाकरण कार्यक्रम क्यों जरूरी है –

नवजात शिशु और छोटे बच्चे अपनी नाजुक उम्र के कारण कई घातक बीमारियों — जैसे पोलियो, खसरा, काली खांसी, डिप्थीरिया, हेपेटाइटिस-बी, टीबी आदि — का शिकार हो सकते हैं। समय पर टीकाकरण इन बीमारियों से 90-95% तक सुरक्षा प्रदान करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार के अनुसार, पूर्ण टीकाकरण से लाखों बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

आंगनवाड़ी केंद्र  इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बनकर काम करते हैं। हर महीने निर्धारित तिथि पर एएनएम आंगनवाड़ी केंद्र पर आती हैं और पात्र बच्चों को नि:शुल्क टीके लगाती हैं।

ANM वीनू शर्मा ने बताया कार्यक्रम कैसे चलता है।

  1. तिथि और स्थान: हर आंगनवाड़ी केंद्र पर महीने के निश्चित दिन (जैसे हर महीने की 7, 15 या 25 तारीख) टीकाकरण सत्र आयोजित होता है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पहले से ही माताओं को सूचना दे देती हैं।
  2. टीकों की सूची (भारत सरकार के राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार):
    • जन्म के समय: बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, ओरल पोलियो
    • 6 सप्ताह: डीपीटी-1, पोलियो-1, हेपेटाइटिस-बी, रोटावायरस, आईपीवी
    • 10 सप्ताह, 14 सप्ताह: डीपीटी-2/3, पोलियो-2/3 आदि
    • 9 माह: खसरा (MR) का पहला डोज
    • 16-24 माह: डीपीटी बूस्टर, खसरा दूसरा डोज, विटामिन-ए
    • और भी कई बूस्टर डोज समय-समय पर दिए जाते हैं।
  3. एएनएम की भूमिका: टीके लगाना, ठंडी श्रृंखला (कोल्ड चेन) बनाए रखना, बच्चों का वजन लेना, माताओं को पोषण और स्वच्छता की सलाह देना।
  4. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका: बच्चों की सूची तैयार करना, माताओं को जागरूक करना, अनुपस्थित बच्चों को फॉलो-अप करना, टीकाकरण कार्ड जारी रखना और सुरक्षित रूप से सत्र का आयोजन करना।

आशा गीता देवी ने टीकाकरण से होने वाले लाभ और उपलब्धियाँ बताई –

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: बच्चों में बीमारियों के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा विकसित होती है।
  • मुफ्त और सुलभ: दूर-दराज के गांवों में भी घर के पास सुविधा।
  • समग्र विकास: टीकाकरण के साथ पोषण, पूर्व-स्कूली शिक्षा और स्वास्थ्य जाँच भी होती है।
  • राष्ट्रीय अभियान: भारत ने पोलियो मुक्त होने का गौरव हासिल किया है, जिसमें आंगनवाड़ी और एएनएम का बड़ा हाथ है।

चुनौतियाँ और समाधान –

कभी-कभी माता-पिता जागरूकता की कमी, अफवाहों या व्यस्तता के कारण बच्चे को टीका लगवाने में देरी करते हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएँ घर-घर जाकर काउंसिलिंग करती हैं।

माता-पिता के लिए सुझाव –

  • बच्चे का टीकाकरण कार्ड हमेशा संभालकर रखें।
  • निर्धारित तिथि पर आंगनवाड़ी केंद्र पर अवश्य पहुँचें।
  • टीके के बाद बच्चे में हल्का बुखार या सूजन हो तो घबराएँ नहीं, यह सामान्य है। जरूरत पड़ने पर एएनएम से संपर्क करें।
  • पड़ोस के बच्चों को भी जागरूक करें।

“टीका लगवाओ, बच्चे बचाओ” — यह नारा सिर्फ स्लोगन नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है।

 

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